ग्राम पंचायत पतारा-चुनाव- 2021

 


ग्राम पंचायत पतारा-चुनाव- 2021

ग्राम पंचायत पतारा-चुनाव- 2021




क्या होती है ग्राम पंचायत

पंचायती राज व्यवस्था (उ० प्र०) में ग्राम पंचायत, पंचायती राज व्यवस्था आम ग्रामीण जनता की लोकतंत्र में प्रभावी भागीदारी का सशक्त माध्यम है। 73वाँ संविधान संशोधन द्वारा एक सुनियोजित पंचायती राज व्यवस्था स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया गया।

            किसी भी ग्रामसभा में 200 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना आवश्यक है। हर गाँव में एक ग्राम प्रधान होता है। जिसको सरपंच या मुखिया भी कहते हैं। 1000 तक की आबादी वाले गाँवों में 10 ग्राम पंचायत सदस्य, 2000 तक 11 तथा 3000 की आबादी तक 15 सदस्य हाेने चाहिए। ग्राम सभा की बैठक साल में दो बार होनी जरूरी है। जिसकी सूचना 15 दिन पहले नोटिस से देनी होती है। ग्रामसभा की बैठक बुलाने का अधिकार ग्राम प्रधान को होता है। बैठक के लिए कुल सदस्यों की संख्या के 5वें भाग की उपस्थिति जरूरी होती है।

ग्राम पंचायत प्रधान के कार्य

  • पंचायत के विकास कार्यक्रमों तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद करना।
  • विभिन्न कार्यक्रमों तथा योजनाओं के लिए लाभार्थी व्यक्तियों की पहचान करना। हालांकि, यदि ग्राम सभा एक बड़े समय तक ऐसे लाभार्थियों की पहचान करने में विफल रहती है तो लाभार्थियों की पहचान ग्राम पंचायत द्वारा कर ली जाती है।
  • सामुदायिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए लोगों से नकद या स्वैच्छिक श्रम के रूप में अथवा दोनों रूपों में सहायता करना।
  • जन, शिक्षा और परिवार कल्याण के कार्यक्रमों में सहायता करना।
  • गांव में सभी समाज के सभी वर्गों के बीच एकता और सद्भाव बढ़ाना।
  • किसी भी कार्य विशेष, योजना, आय तथा व्यय के बारे में मुखिया, उप-मुखिया और ग्राम पंचायत के अन्य सदस्यों से स्पष्टीकरण मांगना।
  • निगरानी समिति की रिपोर्ट के संदर्भ में उचित कार्यवाही की चर्चा और अनुशंसा करना।
  • ग्राम सभा के संज्ञान में लाए गए अन्य विषय।
  • करों, दरों, किराया तथा शुल्क लगाने और उनमें ईजाफा करने पर विचार करना।
  • ग्राम पंचायत द्वारा इसके निर्णय के लिए भेजे जाने वाले सभी मामलों पर विचार करना।

प्रधान को पद से हटाना

यदि ग्राम प्रधान अच्छा कार्य नहीं कर रहा है और समाज उसे अस्वीकार कर रहा है तो  उसे पद से हटाया भी जा सकता है। क्षेत्र के निवासियों एवं पंचायत सदस्यों के द्वारा एक लिखित सूचना जिला पंचायत राज अधिकारी को दी जानी चाहिए, जिसमे ग्राम पंचायत के आधे सदस्यों के हस्ताक्षर होने ज़रूरी होते हैं। सूचना में पदमुक्त करने के सभी कारणों का उल्लेख होना चाहिए। हस्ताक्षर करने वाले ग्राम पंचायत सदस्यों में से तीन सदस्यों का जिला पंचायतीराज अधिकारी के सामने उपस्थित होना अनिवार्य होगा। सूचना प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर जिला पंचायत राज अधिकारी गाँव में एक बैठक बुलाएगा जिसकी सूचना कम से कम 15 दिन पहले दी जाएगी। बैठक में उपस्थित तथा वोट देने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से प्रधान एवं उप प्रधान को पदमुक्त किया जा सकता है।

BDC (बीडीसी)

Block Development Council को हिंदी में प्रखंड विकास समिति भी कहा जाता हैं | प्रखंड स्तर पर एक समिति होता है जो पंचायतों के विकास के कार्यों की देख -रेख करने का काम करता है | यह एक सरकारी संस्था है | यह एक ऐसी संस्था है, जो मुख्य रूप से प्रखंड के विकास कार्यों से लेकर पंचायत योजना को क्रियान्वित  करने के पूरे कामो को करता है | इसके अलावा एक बीडीसी प्रखंड विकास समिति योजनाओं को लागू करने का काम को देखता है एवं फंड का वितरण का भी बीडीसी के द्वारा ही किया जाता है |

BDC के अधिकार

  • बीडीसी को प्रत्येक वर्ष एक जिला परिषद सदस्य दस लाख रुपये से अधिक के विकास कार्य क्रियान्वित करवाने  का अधिकार प्रदान किया जाता है |
  • बीडीसी को 13वें वित्तायोग में जिला परिषदों को 50 फीसद, बीडीसी को 30 और पंचायतों को 20 फीसद धनराशि प्रदान की जाती थी |
  • बीडीसी पहले केंद्र से मिलने वाली सहायता से दस लाख से 15 लाख रुपये अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों पर खर्च करने का अधिकार रखते थे ।
  • इसके बाद 2012 में  बीडीसी की वित्तीय शक्तियां बंद कर दी गई थी जैसे- सड़क निर्माण, श्मशानघाट, महिला व युवक मंडल भवन निर्माण, सराय के साथ-साथ डेढ़ दर्जन कार्यों के लिए  बीडीसी पैसा दे सकते थे।
  • फिर बीडीसी को प्रदान किया जाने वाला बजट 14वें वित्तायोग ने  बंद कर दिया था |

बड़े हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि इस बार हमारे गाँव से बीडीसी के पद हेतु चुनाव मैदान में संतोष सिंह भदौरिया जी आ रहे हैं। मैं उनको अग्रिम शुभकामनायें देते हुये आशा करता हूँ कि समाज के लिए अच्छा कार्य करेंगे। धन्यवाद

ग्राम पंचायत पतारा-चुनाव- 2021
सन्तोष सिंह भदौरिया जी 






Post a Comment

0 Comments